महाभारत 10.6.12
अश्वत्थामा तु संप्रेक्ष्य ताञ्शरौघान्निरर्थकान्रथशक्तिं मुमोचास्मै दीप्तामग्निशिखामिव
aśvatthāmā tu saṃprekṣya tāñśaraughānnirarthakānrathaśaktiṃ mumocāsmai dīptāmagniśikhāmiva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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