महाभारत 10.6.17ततः सर्वायुधाभावे वीक्षमाणस्ततस्ततःअपश्यत्कृतमाकाशमनाकाशं जनार्दनैःtataḥ sarvāyudhābhāve vīkṣamāṇastatastataḥapaśyatkṛtamākāśamanākāśaṃ janārdanaiḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें