महाभारत 10.6.31
तदिदं दैवविहितं मम संख्ये निवर्तनम्नान्यत्र दैवादुद्यन्तुमिह शक्यं कथंचन
tadidaṃ daivavihitaṃ mama saṃkhye nivartanamnānyatra daivādudyantumiha śakyaṃ kathaṃcana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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