महाभारत 10.6.33कपर्दिनं प्रपद्याथ देवदेवमुमापतिम्कपालमालिनं रुद्रं भगनेत्रहरं हरम्kapardinaṃ prapadyātha devadevamumāpatimkapālamālinaṃ rudraṃ bhaganetraharaṃ haramइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें