महाभारत 10.7.25
मौलीधराश्च राजेन्द्र तथाकुञ्चितमूर्धजाःउष्णीषिणो मुकुटिनश्चारुवक्त्राः स्वलंकृताः
maulīdharāśca rājendra tathākuñcitamūrdhajāḥuṣṇīṣiṇo mukuṭinaścāruvaktrāḥ svalaṃkṛtāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें