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महाभारत 10.7.2
द्रौणिरुवाचउग्रं स्थाणुं शिवं रुद्रं शर्वमीशानमीश्वरम्गिरिशं वरदं देवं भवं भावनमव्ययम्
drauṇiruvācaugraṃ sthāṇuṃ śivaṃ rudraṃ śarvamīśānamīśvaramgiriśaṃ varadaṃ devaṃ bhavaṃ bhāvanamavyayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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