महाभारत 10.7.52
ततः सौम्येन मन्त्रेण द्रोणपुत्रः प्रतापवान्उपहारं महामन्युरथात्मानमुपाहरत्
tataḥ saumyena mantreṇa droṇaputraḥ pratāpavānupahāraṃ mahāmanyurathātmānamupāharat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें