महाभारत 10.7.55
भवद्भक्त्या महादेव परमेण समाधिनाअस्यामापदि विश्वात्मन्नुपाकुर्मि तवाग्रतः
bhavadbhaktyā mahādeva parameṇa samādhināasyāmāpadi viśvātmannupākurmi tavāgrataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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