महाभारत 10.7.59
तमूर्ध्वबाहुं निश्चेष्टं दृष्ट्वा हविरुपस्थितम्अब्रवीद्भगवान्साक्षान्महादेवो हसन्निव
tamūrdhvabāhuṃ niśceṣṭaṃ dṛṣṭvā havirupasthitamabravīdbhagavānsākṣānmahādevo hasanniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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