महाभारत 10.7.61
यथावदहमाराद्धः कृष्णेनाक्लिष्टकर्मणातस्मादिष्टतमः कृष्णादन्यो मम न विद्यते
yathāvadahamārāddhaḥ kṛṣṇenākliṣṭakarmaṇātasmādiṣṭatamaḥ kṛṣṇādanyo mama na vidyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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