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महाभारत 10.8.110
पृष्ठच्छिन्नाञ्शिरश्छिन्नान्पार्श्वच्छिन्नांस्तथापरान्समासाद्याकरोद्द्रौणिः कांश्चिच्चापि पराङ्मुखान्
pṛṣṭhacchinnāñśiraśchinnānpārśvacchinnāṃstathāparānsamāsādyākaroddrauṇiḥ kāṃściccāpi parāṅmukhān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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