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महाभारत 10.8.27
राजानं निहतं दृष्ट्वा भृशं शोकपरायणाःव्याक्रोशन्क्षत्रियाः सर्वे धृष्टद्युम्नस्य भारत
rājānaṃ nihataṃ dṛṣṭvā bhṛśaṃ śokaparāyaṇāḥvyākrośankṣatriyāḥ sarve dhṛṣṭadyumnasya bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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