महाभारत 10.8.33तमप्याक्रम्य पादेन कण्ठे चोरसि चौजसातथैव मारयामास विनर्दन्तमरिंदमम्tamapyākramya pādena kaṇṭhe corasi caujasātathaiva mārayāmāsa vinardantamariṃdamamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें