महाभारत 10.8.46
ततस्तेन निनादेन संप्रबुद्धाः प्रभद्रकाःशिलीमुखैः शिखण्डी च द्रोणपुत्रं समार्दयन्
tatastena ninādena saṃprabuddhāḥ prabhadrakāḥśilīmukhaiḥ śikhaṇḍī ca droṇaputraṃ samārdayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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