महाभारत 10.8.48
ततः परमसंक्रुद्धः पितुर्वधमनुस्मरन्अवरुह्य रथोपस्थात्त्वरमाणोऽभिदुद्रुवे
tataḥ paramasaṃkruddhaḥ piturvadhamanusmaranavaruhya rathopasthāttvaramāṇo'bhidudruve
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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