महाभारत 10.8.53
नाकुलिस्तु शतानीको रथचक्रेण वीर्यवान्दोर्भ्यामुत्क्षिप्य वेगेन वक्षस्येनमताडयत्
nākulistu śatānīko rathacakreṇa vīryavāndorbhyāmutkṣipya vegena vakṣasyenamatāḍayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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