महाभारत 10.8.91
तस्मिंस्तमसि संजाते प्रमूढाः सर्वतो जनाःनाजानन्पितरः पुत्रान्भ्रातॄन्भ्रातर एव च
tasmiṃstamasi saṃjāte pramūḍhāḥ sarvato janāḥnājānanpitaraḥ putrānbhrātṝnbhrātara eva ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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