महाभारत 10.8.92
गजा गजानतिक्रम्य निर्मनुष्या हया हयान्अताडयंस्तथाभञ्जंस्तथामृद्नंश्च भारत
gajā gajānatikramya nirmanuṣyā hayā hayānatāḍayaṃstathābhañjaṃstathāmṛdnaṃśca bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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