महाभारत 10.8.93
ते भग्नाः प्रपतन्तश्च निघ्नन्तश्च परस्परम्न्यपातयन्त च परान्पातयित्वा तथापिषन्
te bhagnāḥ prapatantaśca nighnantaśca parasparamnyapātayanta ca parānpātayitvā tathāpiṣan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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