महाभारत 10.8.97
पलायतां दिशस्तेषां स्वानप्युत्सृज्य बान्धवान्गोत्रनामभिरन्योन्यमाक्रन्दन्त ततो जनाः
palāyatāṃ diśasteṣāṃ svānapyutsṛjya bāndhavāngotranāmabhiranyonyamākrandanta tato janāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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