Loading
महाभारत 11.1.22
शोकं राजन्व्यपनुद श्रुतास्ते वेदनिश्चयाःशास्त्रागमाश्च विविधा वृद्धेभ्यो नृपसत्तमसृञ्जये पुत्रशोकार्ते यदूचुर्मुनयः पुरा
śokaṃ rājanvyapanuda śrutāste vedaniścayāḥśāstrāgamāśca vividhā vṛddhebhyo nṛpasattamasṛñjaye putraśokārte yadūcurmunayaḥ purā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें