महाभारत 11.10.13
तथा विशसनं कृत्वा पुत्रशत्रुगणस्य तेप्राद्रवाम रणे स्थातुं न हि शक्यामहे त्रयः
tathā viśasanaṃ kṛtvā putraśatrugaṇasya teprādravāma raṇe sthātuṃ na hi śakyāmahe trayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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