महाभारत 11.13.18
शिक्षयाभ्यधिकं ज्ञात्वा चरन्तं बहुधा रणेअधो नाभ्यां प्रहृतवांस्तन्मे कोपमवर्धयत्
śikṣayābhyadhikaṃ jñātvā carantaṃ bahudhā raṇeadho nābhyāṃ prahṛtavāṃstanme kopamavardhayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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