महाभारत 11.13.7
न कोपः पाण्डवे कार्यो गान्धारि शममाप्नुहिरजो निगृह्यतामेतच्छृणु चेदं वचो मम
na kopaḥ pāṇḍave kāryo gāndhāri śamamāpnuhirajo nigṛhyatāmetacchṛṇu cedaṃ vaco mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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