महाभारत 11.16.38
बिभ्रतः कवचान्यन्ये विमलान्यायुधानि चन धर्षयन्ति क्रव्यादा जीवन्तीति जनार्दन
bibhrataḥ kavacānyanye vimalānyāyudhāni cana dharṣayanti kravyādā jīvantīti janārdana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें