महाभारत 11.16.46आसामपरिपूर्णार्थं निशम्य परिदेवितम्इतरेतरसंक्रन्दान्न विजानन्ति योषितःāsāmaparipūrṇārthaṃ niśamya paridevitamitaretarasaṃkrandānna vijānanti yoṣitaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें