महाभारत 11.16.55
बाहुभिश्च सखड्गैश्च शिरोभिश्च सकुण्डलैःअगम्यकल्पा पृथिवी मांसशोणितकर्दमा
bāhubhiśca sakhaḍgaiśca śirobhiśca sakuṇḍalaiḥagamyakalpā pṛthivī māṃsaśoṇitakardamā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें