महाभारत 11.19.5
युवा वृन्दारकः शूरो विकर्णः पुरुषर्षभसुखोचितः सुखार्हश्च शेते पांसुषु माधव
yuvā vṛndārakaḥ śūro vikarṇaḥ puruṣarṣabhasukhocitaḥ sukhārhaśca śete pāṃsuṣu mādhava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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