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महाभारत 11.2.11
न यज्ञैर्दक्षिणावद्भिर्न तपोभिर्न विद्ययास्वर्गं यान्ति तथा मर्त्या यथा शूरा रणे हताः
na yajñairdakṣiṇāvadbhirna tapobhirna vidyayāsvargaṃ yānti tathā martyā yathā śūrā raṇe hatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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