महाभारत 11.2.5
अयुध्यमानो म्रियते युध्यमानश्च जीवतिकालं प्राप्य महाराज न कश्चिदतिवर्तते
ayudhyamāno mriyate yudhyamānaśca jīvatikālaṃ prāpya mahārāja na kaścidativartate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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