महाभारत 11.2.7
सर्वे स्वाध्यायवन्तो हि सर्वे च चरितव्रताःसर्वे चाभिमुखाः क्षीणास्तत्र का परिदेवना
sarve svādhyāyavanto hi sarve ca caritavratāḥsarve cābhimukhāḥ kṣīṇāstatra kā paridevanā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें