महाभारत 11.2.8
अदर्शनादापतिताः पुनश्चादर्शनं गताःन ते तव न तेषां त्वं तत्र का परिदेवना
adarśanādāpatitāḥ punaścādarśanaṃ gatāḥna te tava na teṣāṃ tvaṃ tatra kā paridevanā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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