महाभारत 11.20.26
एतावानिह संवासो विहितस्ते मया सहषण्मासान्सप्तमे मासि त्वं वीर निधनं गतः
etāvāniha saṃvāso vihitaste mayā sahaṣaṇmāsānsaptame māsi tvaṃ vīra nidhanaṃ gataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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