महाभारत 11.23.25
धर्मेषु कुरवः कं नु परिप्रक्ष्यन्ति माधवगते देवव्रते स्वर्गं देवकल्पे नरर्षभे
dharmeṣu kuravaḥ kaṃ nu pariprakṣyanti mādhavagate devavrate svargaṃ devakalpe nararṣabhe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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