महाभारत 11.23.31
धनुर्मुष्टिरशीर्णश्च हस्तावापश्च माधवद्रोणस्य निहतस्यापि दृश्यते जीवतो यथा
dhanurmuṣṭiraśīrṇaśca hastāvāpaśca mādhavadroṇasya nihatasyāpi dṛśyate jīvato yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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