महाभारत 11.25.19
द्रोणास्त्रमभिहत्यैष विमर्दे मधुसूदनमहेष्वासो हतः शेते नद्या हृत इव द्रुमः
droṇāstramabhihatyaiṣa vimarde madhusūdanamaheṣvāso hataḥ śete nadyā hṛta iva drumaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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