महाभारत 11.25.26
विन्दानुविन्दावावन्त्यौ पतितौ पश्य माधवहिमान्ते पुष्पितौ शालौ मरुता गलिताविव
vindānuvindāvāvantyau patitau paśya mādhavahimānte puṣpitau śālau marutā galitāviva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें