महाभारत 11.25.38
इच्छतोपेक्षितो नाशः कुरूणां मधुसूदनयस्मात्त्वया महाबाहो फलं तस्मादवाप्नुहि
icchatopekṣito nāśaḥ kurūṇāṃ madhusūdanayasmāttvayā mahābāho phalaṃ tasmādavāpnuhi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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