महाभारत 11.25.43
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
तच्छ्रुत्वा वचनं घोरं वासुदेवो महामनाःउवाच देवीं गान्धारीमीषदभ्युत्स्मयन्निव
tacchrutvā vacanaṃ ghoraṃ vāsudevo mahāmanāḥuvāca devīṃ gāndhārīmīṣadabhyutsmayanniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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