महाभारत 11.26.35
कौसल्यं द्रौपदेयांश्च शकुनिं चापि सौबलम्अचलं वृषकं चैव भगदत्तं च पार्थिवम्
kausalyaṃ draupadeyāṃśca śakuniṃ cāpi saubalamacalaṃ vṛṣakaṃ caiva bhagadattaṃ ca pārthivam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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