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महाभारत 11.3.3
विदुर उवाच · vidura uvāca
यतो यतो मनो दुःखात्सुखाद्वापि प्रमुच्यतेततस्ततः शमं लब्ध्वा सुगतिं विन्दते बुधः
yato yato mano duḥkhātsukhādvāpi pramucyatetatastataḥ śamaṃ labdhvā sugatiṃ vindate budhaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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