महाभारत 11.3.7
वैचित्रवीर्य वासं हि दुःखं वा यदि वा सुखम्प्राप्नुवन्तीह भूतानि स्वकृतेनैव कर्मणा
vaicitravīrya vāsaṃ hi duḥkhaṃ vā yadi vā sukhamprāpnuvantīha bhūtāni svakṛtenaiva karmaṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें