महाभारत 11.4.12
कुलीनत्वेन रमते दुष्कुलीनान्विकुत्सयन्धनदर्पेण दृप्तश्च दरिद्रान्परिकुत्सयन्
kulīnatvena ramate duṣkulīnānvikutsayandhanadarpeṇa dṛptaśca daridrānparikutsayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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