महाभारत 11.4.5
योनिद्वारमुपागम्य बहून्क्लेशान्समृच्छतियोनिसंपीडनाच्चैव पूर्वकर्मभिरन्वितः
yonidvāramupāgamya bahūnkleśānsamṛcchatiyonisaṃpīḍanāccaiva pūrvakarmabhiranvitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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