महाभारत 11.5.13अथ तत्रापि चान्योऽस्य भूयो जात उपद्रवःकूपवीनाहवेलायामपश्यत महागजम्atha tatrāpi cānyo'sya bhūyo jāta upadravaḥkūpavīnāhavelāyāmapaśyata mahāgajamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें