महाभारत 11.7.11
संवत्सरर्तवो मासाः पक्षाहोरात्रसंधयःक्रमेणास्य प्रलुम्पन्ति रूपमायुस्तथैव च
saṃvatsarartavo māsāḥ pakṣāhorātrasaṃdhayaḥkrameṇāsya pralumpanti rūpamāyustathaiva ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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