महाभारत 11.8.33
पाण्डवाः कौरवाश्चैव समासाद्य परस्परम्न भविष्यन्ति कौन्तेय यत्ते कृत्यं तदाचर
pāṇḍavāḥ kauravāścaiva samāsādya parasparamna bhaviṣyanti kaunteya yatte kṛtyaṃ tadācara
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें