महाभारत 11.8.8
येन दह्यन्ति गात्राणि येन प्रज्ञा विनश्यतियेनाभिभूतः पुरुषो मरणं बहु मन्यते
yena dahyanti gātrāṇi yena prajñā vinaśyatiyenābhibhūtaḥ puruṣo maraṇaṃ bahu manyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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