महाभारत 12.1.30
सोऽहं निर्जित्य समरे विजयं सहकेशवम्संधास्ये धर्मपुत्रेण पश्चादिति च सोऽब्रवीत्
so'haṃ nirjitya samare vijayaṃ sahakeśavamsaṃdhāsye dharmaputreṇa paścāditi ca so'bravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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