महाभारत 12.1.37
अहं त्वज्ञासिषं पश्चात्स्वसोदर्यं द्विजोत्तमपूर्वजं भ्रातरं कर्णं पृथाया वचनात्प्रभो
ahaṃ tvajñāsiṣaṃ paścātsvasodaryaṃ dvijottamapūrvajaṃ bhrātaraṃ karṇaṃ pṛthāyā vacanātprabho
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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